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सिंह के बदले सिंह को ही चुना भाजपा ने

पत्रकार भीम सिंह सीहरा की कलम से... आखिरकार आज भाजपा ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर दी। जबलपुर सांसद राकेश सिंह ने आज भाजपा के  नए प्रदेशाध्यक्ष पद की शपथ ली। सिंह की नियुक्ति को लेकर कहा जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पंसद हैं। लेकिन वर्तमान में चल रहे घटनाक्रम को देखकर ऐसा लग रहा है कि नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की पंसद है। यानि सिंह के बदले में सिंह को ही लाया गया है। इसके कई सारे कारण साफ नजर आते हैं। शिवराज भले ही जनता की पहली पसंद हो, लेकिन चुनाव के मामले में अदभुत संगठनात्मक क्षमताओं वाले नरेंद्र सिंह ताेमर का कोई तोड़ पार्टी को नजर नहीं आ रहा है। वजह भी ठोस है। पिछले दो चुनाव में शिवराज और नरेंद्र सिंह ताेमर की जोड़ी ने जिस तरह से शानदार जीत दिलाई वह सबके सामने है। इस बार तोमर प्रदेशाध्यक्ष के लिए इच्छुक नहीं थे तो पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा, वीडी शर्मा, भूपेंद्र सिंह समेत अन्य कई नामों पर विचार किया। मगर मामला जमा नहीं। देर रात राकेश सिंह के नाम पर सहमति बनी या यूं कहें कि पहले से ही यह नाम त
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जनता के मुद्दों से जुड़ी लेफ्ट टर्न विषय पर मेरी आज की खबर

पढ़िए डीबी स्टार दैनिक भास्कर भोपाल में...

यह विज्ञापन क्या सिखा रहा है।

अभी पिछले *कुछ दिनों से टी वी के सभी चैंनलों पर Axis bank के होम फाइनेंस का विज्ञापन दिखाया जा रहा है।*जिसमे एक कार में माँ बेटा बैठे हुए आपस मे बात कर रहे है, जिसमे माँ बेटे से उसकी शादी के पहले ही अलग मकान लेने कह रही है, बेटा वजह पूछता है तो माँ कहती है कि बहु आएगी तो उसे एडजस्ट करने में दिक्कत होगी, टोका टोकी होगी, इससे अच्छा तुम अभी से नया घर ले लो । और वह आज्ञाकारी बेटा तुरंत माँ की बात मान लेता है । *अब प्रश्न ये है कि यह विज्ञापन क्या संदेश दे रहा है समाज को ? ऐसे विज्ञापनों के द्वारा हमारे भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर करारी चोट की जा रही है।* हर माँ बाप का सपना होता है कि बेटा जब बड़ा होगा तब शादी करके बहु को घर मे लाएंगे, बहुरानी का स्वागत करेंगे, समयानुसार जब नाती पोते होंगे तो उनकी खिलखिलाहट से घर गूंजेगा । दादा दादी की पदवी मिलेगी । पर *इस विज्ञापन के धूर्त संदेश से युवाओं को माँ बाप से दूर करने की शिक्षा दी जा रही है । लानत है ऐसे बैंक और उन एडवरटाइजिंग एजेंसी पर जो हमारे पारिवारिक संस्कारों और मूल्यों पर चोट कर रहे है । इन्हें तुरंत बंद करना चाहिए।*,,,आप सभी इसका विरोध क

पुत्र के राज में पितातुल्य किसानों पर गोलीचालन

सुना था सत्ता के लिए मुगल सम्राट ने अपनों का कत्ल कर दिया था। लेकिन  कलयुग में किसान के बेटे ने अपने पितातुल्य किसानों पर ही गोली चलवा दी। इसके बाद सरकार के गृहमंत्री द्वारा पुलिस गोलीचालन से मुकरना, आंदोलनकारी किसानों को विराेधियों द्वारा भड़काना तथा उन्हें असामाजिक तत्व करार देना आश्चर्यजनक है। फिर सरकार के मुखिया द्वारा मृत किसानों के परिजनों को एक करोड़ रुपए तथा घायलों को पांच लाख रुपए की सहायता देना भी अचंभित करता है। यह राज्य सरकार की अक्षमता, अदूरदर्शिता, अज्ञानता और अति भयभीत होने का प्रमाण है। जब आंदोलनकारी किसान नहीं थे तो कौन थे? गोली पुलिस ने नहीं तो किसने चलाई? अगर पुलिस की गोली से किसान नहीं मरे तो फिर इतना मुआवजा देने का क्या औचित्य है? सरकार के मुखिया और उसके गृहमंत्री द्वारा अटपटे बयान देने से जाहिर है कि शिवराज सरकार कितनी अपरिपक्व है। सरकार की असंवेदनशीलता का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि आंदोलनकारियों से सरकार के किसी भी नुमांइदे ने बात करने की कोशिश नहीं की। आंदोलन को विफल करने के लिए आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ से आंदोलन स्थगित कराने का बयान दिलवाया। जबकि संघ का

अब इतना सन्नाटा क्यों पसरा है भाई

आज की बड़ी खबर है कि जिस दादरी कांड के लिए अखलाक के परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। ऐसा फैसला ग्रेटर नोएडा की एक अदालत ने दिया है। बिसाीडा गांव के लोगों ने ही यह केस लगाया था, जिसमें फैसला भी आ गया है। गौरतलब है कि पूरी जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि अखलाक के घर के भीतर फ्रिज जो मीट पाया गया था वह गोवंश का ही था। लेकिन इसके पहले रिपोर्ट के ऊपर बिना चर्चा किए और बिना किसी प्रमाण के अखलाक को बेकसूर ठहराकर कई लोगाें को जेल में बंद कर दिया गया। इससे भी ज्यादा हंगामा बरपाया गया कि अखलाक बेकसूर था और भारत में असहिष्णुता फैल रही है। यहां तक कि कुछ लोगों ने तो असहिष्णुता को मुद्दा बनाकर भारत में स्वयं को असुरक्षित करार दे दिया। तो कुछ की पत्नियाें ने देश छोड़ने की बात कर डाली। लेकिन अब यही लोग खामोशी की चादर ओढ़कर बैठ गए हैं।

BBC का ये लेख भारत के मुसलमानों की कौन सी तस्वीर दिखाना चाहता है

आप भी पढ़िए की क्या ये सच है और यदि सच नहीं है तो फिर लिखा क्यों गया? यदि लिखा तो इस पर विरोध क्यों नहीं? http://www.bbcbharat.com/slavery-terrorism-and-islam-the-historical-roots-and-contemporary-threat/

भाजपा का सपना कांग्रेस कर रही है पूरा

आखिरकार पांच राज्यों के चुनाव संपन्न हो गए और परिणाम सामने है। लेकिन इस पूरे चुनाव में परिणाम के बाद जितनी चर्चा अम्मा (जयललिता) और दीदी (ममता बनर्जी) की जीत की नहीं हुई, उतनी कांग्रेस मुक्त भारत की हुई। हो भी क्यों न, आखिर देश की सबसे बड़ी पार्टी इस समय देश की सबसे छोटी पार्टी बनने की कगार पर पहुंच गई है। एक समाचार पत्र ने आंकलन किया है कि कांग्रेस अब देश के बीस प्रतिशत हिस्से में ही बची है। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि कांग्रेस मुक्त भारत का सपना पूरा करने में भाजपा की मदद जनता कर रही है या फिर कांग्रेस स्वयं अपने कर्मो से इस हाल में पहुंच गई है। बहुत सारी बातें हो रही है चुनाव जीतने व हारने को लेकर और मैं इतना अनुभवी भी नहीं कि कोई ठोस कारण बता पाऊं। लेकिन एक बात जो मुझे समझ में आई कि कांग्रेस का हाल कुछ-कुछ नोकिया जैसा हो गया। एक समय नोकिया बाजार में एकछत्र राज्य करता था, लेकिन समय के साथ बदलाव नहीं किया यानि नए सिस्टम एंड्राइड को नहीं अपनाया तो आज बाजार में कई पायदान नीचे है। जबकि भाजपा सेमसंग की भांति नए फंडे अपनाकर आगे की तरफ बढ़ रही है। कमाल की बात तो यह है कि जिन