Friday, July 16, 2010

पूरा हुआ लक्ष्मण का बनवास

भोपाल से... एक लम्बे समय तक लक्ष्मण सिंह कांग्रेस से दूर रहे और आज बदजुबानी को बहाना बनाकर भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. ये सभी के लिए एक सबक है, जिसमे साडी बातें सामने आ जाती हैं. दरअसल लक्ष्मण सिंह का मन तभी से पार्टी में नहीं लएजी रहा था जबसे भाजपा केंद्र के चुनाव हरी और उसके बाद में खुद लक्ष्मण सिंह अपने ही भाई की तरफ से खड़े किये गए गए प्यादे से हार गए. बदजुबानी तो पहले भी हुई है लेकिन निर्णय आज ही क्यों कर दिया गया. शायद लक्ष्मण सिंह भी यही चाहते थे क्योंकि वे व्ही अपनी अयोध्या से बहुत दिनों तक दूर नहीं रह सकते हैं. आख़िरकार बहाना कोई भी हो लेकिन आज लक्ष्मण का वन्बास तो पूरा हुआ. 

(दैनिक भास्कर की खबर पड़ने के लिए किल्क करैं)
 खबर आज की जिसमे है पूरा घटनाक्रम...
भोपाल. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के अनुज और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को प्रदेश भाजपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। नितिन गडकरी के खिलाफ बयानबाजी के चलते यह कार्रवाई हुई है। हाल ही में गडकरी ने दिग्विजय सिंह के बारे में कहा था कि आतंवादियों की तरफदारी करने वाले औरंगजेब की औलाद हैं।
इस टिप्पणी के बाद लक्ष्मण सिंह ने खुलकर गडकरी की आलोचना की थी। तभी से उन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। उधर लक्ष्मण सिंह ने दैनिक भास्कर से चर्चा में कहा कि उन्हें इस कार्रवाई से कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गडकरी और उनके नेतृत्व में भाजपा इन दिनों जिस तरह की भाषा बोल रही है वह निरंकुश और हिटलरशाही प्रवृत्ति को दर्शाती है। हाल ही मप्र में मंत्रियों के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई हुई है वह इसकी पुष्टि करती है।उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी और तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह के समय भाजपा सही रास्ते पर थी। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि गडकरी ने उनके परिवार के खिलाफ जिस अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया उसके बाद उनका चुप रहना असंभव था।
भविष्य के बारे में विचार नहीं-लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि वह कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी से जुडें़गे। मैं सामाजिक कार्यकर्ता की तरह काम करुंगा।
इसलिए आए थे भाजपा में
लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नेतृत्व स्वीकार्य नहीं था। इसलिए वे भाजपा से जुड़े थे। सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते क्या वे फिर कांग्रेस में लौटेंगे? इसका उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। सात साल तक नाता रहा भाजपा से
2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान ब्यावरा में उमा भारती की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में लक्ष्मण सिंह कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें 2004 के लोकसभा चुनाव में राजगढ़ लोकसभा सीट से टिकट दिया और वे विजयी हुए। 2009 में भी वह भाजपा के टिकट पर इसी सीट से चुनाव लड़े, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार नारायण सिंह अमलाबे के हाथों पराजित हो गए। वे राजगढ़ से कुल पांच बार सांसद रहे। इनमें से चार बार वह कांग्रेस के टिकट पर जीते थे. 

1 comment:

Jandunia said...

शानदार पोस्ट