Friday, December 25, 2015

मोदी का मास्टर स्ट्रोक

बस कयास लग रहे हैं, असली मकसद समझ से बाहर है
आज मोदी ने जबरदस्त मास्टर स्ट्रोक खेला। उन्होंने अचानक पाकिस्तान जाकर और किसी खास मित्र की तरह नवाज शरीफ से मुलाकात लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मोदी पाकिस्तान घूमकर भी आ गए और कोई हो-हल्ला नहीं हुआ। परंपरा अनुसार कांग्रेस ने इस यात्रा का विरोध यह कहकर कर दिया कि पहले से मीटिंग फिक्स थी। लेकिन उनकी तरफ से यह बात बिना किसी प्रमाणिकता के कहीं जाने का एक ही मतलब है कि जैसे कोई खिसयानी बिल्ली खंबा नोंच रही है। कांग्रेस के एक और प्रवक्ता ने तो यह तक कह दिया कि किसी उद्योगपति ने यह मीटिंग फिक्स कराई, लेकिन उस उद्योगपति का नाम वे नहीं बता पाए। खैर हम बात करें यात्रा कि इसके मायने किसी को भी समझ में नहीं आए हैं। जानकार, बुद्धिजीवी, मीडिया, विरोधी और अन्य केवल कयास लगा रहे हैं कि आखिर सब अचानक कैसे हो गया? पाकिस्तान में मोदी के कदम पड़ते ही चर्चा, चिलपों शुरू हो गया। इस दौरान देखा कि कष्मीर के नेता, आर्मी के विषेषज्ञ इसे अच्छी पहल बता रहे हैं, लेकिन कुछ और भी संदेष हैं जिस पर शायद किसी का ध्यान नहीं गया।
पहला तो यह कि मोदी पाकिस्तान यात्रा को बहुत ज्यादा तूल नहीं देना चाहते थे और उनके दिमाग में 25 दिसम्बर की तारीख पहले से तय थी। क्योंकि यह सिर्फ संयोग नहीं हो सकता है कि आज अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जिन्ना और नवाज शरीफ का भी जन्मदिन है। वहीं नवाज शरीफ की नवाजी मेहरूनिसां की शादी है। निष्चित रूप से योजना पहले ही मोदी के दिमाग में जन्म ले चुकी थी। बस वे इस यात्रा पर कोई बवाल नहीं चाहते थे। यदि घोषित करके पाकिस्तान यात्रा की जाती तो विरोधियों के साथ षिवसेना व पार्टी के अंदर ही इस बात का विरोध शुरू हो जाता। अब चूंकि यात्रा हो ही गई है तो सिर्फ विलाप करने या खुषियां मनाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। एक और बात जो मोदी ने सबको समझाई है कि वे पाकिस्तान को बहुत बड़ा नहीं समझते हैं और जैसे देष में भ्रमण करते हैं वैसे ही उनके लिए पाकिस्तान है। यानि वे जो कहते थे कि भारत के लिए पाकिस्तान छोटी समस्या यह है तो यह बात मोदी के काम में नजर भी आ रही है। वे चहल कदमी करते हुए गए और फिर भारत आ गए। इस यात्रा के बाद परिणाम क्या आएंगे, ये तो आना वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल मोदी का कद बढ़ा है और नवाज अपने बचे-खुचे बाल नोंचते हुए सोच रहे होंगे कि वे इसका क्या जवाब दें। क्योंकि मोदी तो शादी के बहाने आ गए, लेकिन नवाज तो ऐसा भी नहीं कर पाएंगे।
कहीं जेटली को बचाने के लिए तो नहीं उठाया कदम!
इस यात्रा के कई सारे मायने हैं और एक मायना यह भी लगता है कि इस पूरी यात्रा से मीडिया व देष का पूरा ध्यान बंट गया है। जबकि कल तक डीडीसीए घोटाले के बहाने लगातार जेटली पर निषाना साधा जा रहा था। विरोधी भी मजबूरन सब काम छोड़कर मोदी की पाकिस्तान यात्रा पर राग अलापने लगे हैं। मोदी ने अपने एक कदम से हवा का रूख बदल दिया है और संभवतः अगले एक-दो दिन में वे समस्या को ही खत्म कर दें। इस बीच केजरीवाल ने डीडीसीए के लिए आयोग बनाने की नाकाम कोषिष भी कर डाली।