Sunday, February 10, 2013

एक नई पहल-एक आवाज उठी और अरेरा कॉलोनी का ई-३ सेक्टर बनने लगा सबसे ग्रीन-सबसे क्लीन


जब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मूंह मोडऩे लगे, राजनीतिज्ञ कन्नी काटने लगे तो आम आदमी को अपना काम करने के लिए स्वयं आगे आना पड़ता है और फिर इसके परिणाम भी सुखद ही होते हैं। ऐसा ही एक बड़ा सकारात्मक काम देखने को मिला ई-३ अरेरा कॉलोनी में। रविवार को यहां के बच्चे, बूढ़े और जवानों के साथ महिलाएं भी अपनी कॉलोनी को सबसे क्लीन, सबसे ग्रीन बनाने के लिए जुटी थीं। 
_______
राजधानी की सबसे सबसे पॉश कॉलोनी अरेरा कॉलोनी के सेक्टर ई-३ में अन्य रविवारों की तरह सुबह ७ बजे तक शांति छाई थी, लेकिन ८ बजे तक यहां की सड़कों पर कोलाहल होने लगा। हरे रंग के एप्रेन पहने लोग अपने घरों से निकलकर सड़क पर आ रहे थे। उनके चेहरों पर गजब का उत्साह था वे कुछ कर गुजरने के लिए तत्पर थे। यह किसी आक्रामक आंदोलन की तैयार नहीं थी, लेकिन आंदोलन से कम भी नहीं था।  दरअसल अरेरा कॉलोनी ई-३ के निवासी अपने सेक्टर को क्लीन और ग्रीन बनाने के लिए रविवार की अलसुबह ही उठ गए थे। ठीक ८.३० बजे ये लोग ई-३ सेक्टर की एक सड़क पर जमा हो गए और फिर शुरू हुआ सड़क किनारे पड़ी पॉलीथिन, बोतलें और कचरे को बीनने का अभियान। ५० से ज्यादा लोगों का यह हुजूम क्लीन ई-३, ग्रीन ई-३ कहते हुए आगे बढ़ रहे थे। इनके साथ छोटे-छोटे बच्चे चार डस्टबीन खींच रहे थे, जिसमें बाकी लोग कचरा बीनकर डालते जा रहे थे। इस पूरी टीम का नेतृत्व डॉ. राजेश शर्मा और विजय व्यास कर रहे थे। कई सड़कों की सफाई करते हुए टीम उत्साह के साथ आगे बढ़ती जा रही थी। ठीक दो घंटे बाद यानी १०.३० बजे अभियान को रोका गया और फिर सभी ने आनंद पार्क के पास एक साथ चाय पीकर एक-दूसरे को अगले रविवार तक के लिए अलविदा कहा।
हिवरे बाजार गांव को देखकर मिली प्रेरणा
इस जबरदस्त आयडिया की शुरूआत कैसे हुई तो वहां मौजूद लोगों ने एक स्वर में डॉ. राजेश शर्मा और उनके साथी विजय व्यास का नाम लिया। दरअसल इसी सेक्टर में रहने वाले डॉ. राजेश शर्मा वर्ष २००८ में अपने किसी निजी काम से महाराष्ट्र गए और वहां उन्हें अहमद नगर जिले के हिवरे बाजार गांव जाने का मौका मिला। यह गांव प्रसिद्ध समाज सेवी डॉ. बाबा आम्टे के गांव के पास ही बसा हुआ है और यहां के मुखिया पोपट राव पवार हैं। डॉ. शर्मा ने यहां देखा कि पूरे गांव को स्वयं ग्रामीणों ने साफ-सुथरा बनाकर रखा है और ऐसे साफ किया है कि एक पॉलीथिन भी कहीं दिखाई तक नहीं देती है। इस गांव के लोग महीन में कोई भी पांच दिन सफाई करते हैं और इसके लिए एक घर से एक सदस्य अपना समय देता है। महाराष्ट्र से लौटकर डॉ. शर्मा ने होशंगाबाद के करीब १५ गांव में शुरूआत की।
प्रत्येक माह के दूसरे रविवार चलाया जाएगा अभियान
डॉ. शर्मा ने नवंबर २०१२ में ई-३ को लेकर एक योजना बनाई और अपने मित्र विजय व्यास से चर्चा की। विजय व्यास ने अरेरा विकास समिति के लोगों से संपर्क तय किया कि हर माह के दूसरे रविवार यह सफाई अभियान चलाया जाए और १३ जनवरी २०१३ के दूसरे रविवार से इसकी शुरूआत हो गई। अरेरा कॉलोनी के बड़े सेक्टरों में शुमार ई-३ को यहां की ग्रीन और क्लीन टीम ने एक बार तो पूरी तरह साफ कर दिया है। ३५२ मकान, १४ मुख्य सड़क और १८ सर्विस रोड वाले इस सेक्टर के बाशिंदों का कहना है कि वे अब इसे दोबारा गंदा नहीं होने देंगे।
एक लाख पौधे भी लगाएंगे
क्लीन ई-३, ग्रीन ई-३ का नारा देने के बाद अब यहां के रहवासी इसे मूर्तरूप देने में जुट गए हैं। दरअसल साफ-सफाई से केवल क्लीन ई-३ ही सार्थक हो रहा है और ग्रीन ई-३ को सार्थक करने के लिए जुलाई २०१३ में एक लाख पौधों को पूरे ई-३ सेक्टर में रोपित किया जाएगा। इसके साथ ही ई-3 में बच्चों के खेलने-कूदने के लिए सभी पार्कों का विकास किया जाएगा। साथ ही ध्यानकेंद्र  और अन्य सामाजिक गतिविधियों को ठीक ढंग से संचालित करने के लिए भी योजना बनाई जाएगी। 














No comments: