Thursday, July 8, 2010

जिम्मेदारी निभा लेते तो अनुराधा आज माँ बन जाती

भोपाल. सुना है की मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में एक महिला कैदी को पुलिस प्रसाशन की गलती के कारण अपना बछा खोना पड़ा और अब राज्य महिला आयोग उस महिला को इंसाफ दिलाने की तय्यारी शुरू कर चुकी है. यानी एक महिल फिर तैयार है महिला आयोग के डमरू पर नाचने के लिए. दरअसल जी हादसे के लिए जेल और पुलिस प्रसाशन को जिम्मेदार मन जा रहा है उसके लिए तो राज्य महिला आयोग और मानव अधिकार आयोग भी जिम्मेदार हैं क्योंकि इन दोनों ने कभी जाकर नहीं देखा की क्या इन जेलों में महिला कैदियों के लिए कोई उम्दा व्यवस्था है. जब यैसा नहीं किया तो फिर जबरिया इंसाफ दिलाने के धिन्दोरे पीटने से क्या मतलब?
क्या है घटनाक्रम
राज्य महिला आयोग ने महिला कैदी के बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय जेल जाकर मामले की जानकारी ली। जांच के दौरान मिले हुए बयान और प्रस्तुत किए साक्ष्य को देखने के बाद महिला आयोग ने भी माना कि अनुराधा के साथ न केवल पुलिस गार्ड ने बल्कि जेल प्रशासन ने क्रूरता की है। आयोग का मानना है कि यदि उसे समय पर चिकित्सा सुविधा मुहैया की जाती तो उसके दोनों बच्चों को बचाया जा सकता था। आयोग की सदस्य उपमा राय और कमला वाडिया ने पूरे मामले की जांच की।
होशगांबाद पिपरिया की रहने वाली अनुराधा पति राजेश कहार ने राज्य महिला आयोग जो बयान दिए उससे सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। उसने आयोग को बताया कि दहेज हत्या के मामले में २८ जून को कोर्ट ने शाम साढ़े छह बजे उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। उसके बाद पिपरिया पुलिस उसे और उसकी मां को पुलिस की गाड़ी में बैठाकर वहां से निकली। वहां उसकी मां ने महिला पुलिस गार्ड को बताया कि उसकी बेटी गर्भवती है और उसे छह माह का गर्भ है। उसकी तबियत खराब हो रही है गाड़ी धीरे चलाए, लेकिन पुलिस ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और न ही गाड़ी रोकी यहां तक की रास्ते में उसे पानी तक नहीं पीने दिया। उसके बाद उसे होशंगाबाद जेल पंहुचा दिया गया। होशंगाबाद जेल में उसे दो दिन रखा गया और वहां पर भी उसका मेडिकल नहीं कराया गया। ३० जून को होशंगाबाद से फिर उसे गाड़ी में बैठा केंद्रीय जेल पहुंचाया गया। यहां पर 1 मई को रुटीन चेकअप के लिए आई नर्स को तबियत खराब होने की जानकारी दी। नर्स ने उसे फौरन जेल अस्पताल पहुंचाया जहां जेल के डॉक्टर ने उसे सुलतानिया रेफर कर दिया। जेल प्रशासन ने आयोग को बताया कि पुलिस गार्ड न मिलने के कारण उसे तुरंत सुलतानिया नहीं भेजा जा सका। तीन जुलाई को जब पुलिस गार्ड मिली तब उसे सुलतानिया भेजा गया। जहां डॉक्टरों ने जांच केबाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती करने की सलाह दी लेकिन पुलिस गार्ड ने उसे भर्ती कराने से मना कर दिया और उसे जेल भेज दिया जहां जेल डॉक्टर की सलाह पर उसे फिरसे अस्पताल में भर्ती कराया गया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चार जुलाई को अनुराधा के दोनों बच्चों की मौतगर्भ में ही हो चुकी थी और उसकी भी हालत गंभीर हो गई थी। उसे भी बड़ी मुश्किल से बचाया जा सका।
इनका कहना है:
पूरे साक्ष्य और बयानों के सुनने के बाद जो तथ्य सामने आए है उससे एक बात साबित होती है कि जेल प्रशासन और पुलिस गार्ड ने पूरे समय संवेदनहीनता दिखाई है। यदि उसे समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो निश्चत ही दोनों बच्चों की जान बच जाती।
उपमा राय, सदस्य , राज्य महिला आयोग

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