Saturday, June 12, 2010

देश के राष्ट्रपति और इतिहास

भोपाल. कई बार मन सवाल उठता है की देश में राष्ट्रपति तो है लेकिन सीधे तौर पर कभी भी वे दखल नहीं देते. आरोप भी लगते रहे हैं की राष्ट्रपति स्टाम्प पेपर की तरह इस्तेमाल किये जाते हैं. हालाँकि इस मामले में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम थोड़े अलग रहे हैं. इस बार राष्ट्रपति से जुडी कुछ जानकारी भारतआज  पर.
भारत के राष्ट्रपति-
भारत के राष्ट्रपति  या भारतीय राष्ट्रपति राष्ट्रप्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक हैं, साथ ही भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख सेनापति भी हैं। सिद्धांतः राष्ट्रपति के पास पर्याप्त शक्ति होती है। पर कुछ अपवादों के अलावा राष्ट्रपति के पद में निहित अधिकांश अधिकार वास्तव में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले मंत्रिपरिषद के द्वारा उपयोग किए जाते हैं।
राष्ट्रपति को भारत के संसद के दोनो सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) तथा साथ ही राज्य विधायिकाओं (विधान सभाओं) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा पाँच वर्ष की अवधि के लिए चुना जाता है। पदधारकों को पुनः चुनाव में खड़े होने की अनुमति दी गई है। वोट आवंटित करने के लिए एक फार्मूला इस्तेमाल किया गया है ताकि हर राज्य की जनसंख्या और उस राज्य से विधानसभा के सदस्यों द्वारा वोट डालने की संख्या के बीच एक अनुपात रहे और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों और राष्ट्रीय सांसदों के बीच एक समानुपात बनी रहे। अगर किसी उम्मीदवार को बहुमत प्राप्त नहीं होती है तो एक स्थापित प्रणाली है जिससे हारने वाले उम्मीदवारों को प्रतियोगिता से हटा दिया जाता है और उनको मिले वोट अन्य उम्मीदवारों को तबतक हस्तांतरित होता है, जबतक किसी एक को बहुमत नहीं मिलती। उपराष्ट्रपति को लोक सभा और राज्य सभा के सभी (निर्वाचित और नामजद) सदस्यों द्वारा एक सीधे मतदान द्वारा चुना जाता है।
भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में रहते हैं, जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। राष्ट्रपति अधिकतम दो कार्यकाल तक हीं पद पर रह सकते हैं। अब तक केवल पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने हीं इस पद पर दो कार्यकाल पूरा किया है।
महामहिम प्रतिभा पाटिल भारत की 12वीं तथा इस पद को सुशोभीत करने वाली पहली महिला राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई, 2007 को पद व गोपनीयता की शपथ ली थी।
जब एक महिला बनी राष्ट्रपति-
आजादी की 60वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे भारतीय गणतंत्र में 12वें राष्ट्रपति के चुनाव के बाद प्रतिभा  पाटिल देश की पहली महिला प्रथम नागरिक होंगी। 15 अगस्त 1947 को आजादी हासिल करने के बाद 26 जनवरी 1950 को देश का संविधान लागू हुआ और 30 जनवरी 1950 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने देश के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में अपना कार्यभार संभाला।नवविर्नाचित राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की तरह डॉ. प्रसाद भी पेशे से वकील थे। वह 13 मई 1962 तक इस पद पर रहे।
उनके बाद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के राष्ट्रपति बने और ठीक 5 साल तक इस पद पर रहे। 13 मई 1967 को डॉ. जाकिर हुसैन ने यह पद संभाला। उनके निधन के कारण 24 अगस्त 1969 में वी.वी. गिरि देश के चौथे राष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने इससे पहले 3 मई 1969 से 20 जुलाई 1969 तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में यह पद संभाला और उनके बाद 20 जुलाई से 24 अगस्त के बीच मोहम्मद हिदायतुल्लाह कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे। डॉ. फखरुद्दीन अली अहमद 24 अगस्त 1974 को देश के पांचवे राष्ट्रपति बने, लेकिन 11 फरवरी 1977 में उनके निधन के कारण बासप्पा दानप्पा जत्ती को 25 जुलाई तक कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया और उनके बाद 25 जुलाई 1977 को नीलम संजीव रेड्डी इस शीर्ष संवैधानिक पद पर आसीन हुए। 

इतिहास-15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था और अन्तरिम व्यवस्था के तहत देश एक राष्ट्रमंडल अधिराज्य बन गया। इस व्यवस्था के तहत भारत के गवर्नर जनरल को भारत के राष्ट्रप्रमुख के रूप में स्थापित किया गया, जिन्हें भारत के अन्तरिम राजा - जॉर्ज VI द्वारा ब्रिटिश सरकार के बजाय भारत के प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त करना था।

यह एक अस्थायी उपाय था, परन्तु भारतीय राजनीतिक प्रणाली में साझा राजा के अस्तित्व को जारी रखना सही मायनों में संप्रभु राष्ट्र के लिए उपयुक्त विचार नहीं था। आजादी से पहले भारत के आखरी ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन हीं भारत के पहले गवर्नर जनरल बने थे। जल्द ही उन्होंने सी.राजगोपालाचारी को यह पद सौंप दिया, जो भारत के इकलौते भारतीय मूल के गवर्नर जनरल बने थे। इसी बीच डा. राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में संविधान सभा द्नारा 26 नवम्बर 1949 को भारतीय सविंधान का मसौदा तैयार हो चुका था और 26 जनवरी 1950 को औपचारिक रूप से संविधान को स्वीकार किया गया था। इस तारीख का प्रतीकात्मक महत्व था क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटेन से पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता को आवाज़ दी थी। जब संविधान लागू हुआ और राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति का पद सभांला तो उसी समय गवर्नर जनरल और राजा का पद एक निर्वाचित राष्ट्रपति द्वारा प्रतिस्थापित हो गया।
इस कदम से भारत की एक राष्ट्रमंडल अधिराज्य की स्थिति समाप्त हो गया। लेकिन यह गणतंत्र राष्ट्रों के राष्ट्रमंडल का सदस्य बना रहा। क्योंकि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ने तर्क किया की यदि कोई भी राष्ट्र ब्रिटिश सम्राट को "राष्ट्रमंडल के प्रधान" के रूप में स्वीकार करे पर ज़रूरी नहीं है की वह ब्रिटिश सम्राट को अपने राष्ट्रप्रधान की मान्यता दे, उसे राष्ट्रमंडल में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह एक अत्यन्त महत्वपूर्ण निर्णय था जिसने बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में नए-स्वतंत्र गणराज्य बने कई अन्य पूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों के राष्ट्रमंडल में रहने के लिए एक मिसाल स्थापित किया।

राष्ट्रपति का चुनाव-

राष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक योग्यता

भारत का कोई नागरिक जिसकी उम्र 35 साल या अधिक हो वो एक राष्ट्रपति बनने के लिए उम्मीदवार हो सकता है। राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार को लोकसभा का सदस्य बनने की योग्यता होना चाहिए और सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण नहीं करना चाहिए। परन्तु निम्नलिखित कुछ कार्यालय-धारकों को राष्ट्रपति के उम्मीदवार के रूप में खड़ा होने की अनुमति दी गई है:
यदि उपराष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल या मंत्री को राष्ट्रपति चुना जाता है, तो यह उमीद की जाती है की जिस तारीख को वे राष्ट्रपति के रूप में सेवा शुरू करते हैं, उस दिन वह अपना पिछला पद छोड़ चुके होंगे.

चुनाव पद्धति-

जब भी राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने वाला होता है, तो एक निर्वाचन मंडल द्वारा नया राष्ट्रपति चुना जाता है। इस निर्वाचन मंडल में संसद के दोनों सदनों और राज्य विधान सभाओं (विधान सभा) के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। आनुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति के माध्यम से चुनाव आयोजित किया जाता है। गुप्त मतदान प्रणाली द्वारा मतदान होता है। अनुच्छेद 55 में राष्ट्रपति के चुनाव विस्तृत ब्योरा दिया गया हैं।
हालाकीं राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों और राज्य विधान सभाओं (विधान सभा) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा होता है। पर आमतौर से वे अपनी राजनैतिक दलों द्वारा समर्थित उम्मिद्वारों को हीं अपना मत देते हैं।
 
निर्वाचन मंडल
राज्य विधान सभाओं और संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा डाली वोट का मूल्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 55 (2) के उपबंधों के अनुसार निर्धारित किया जाता है। 2007 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाता और वोट की संख्या का विवरण नीचे दिया गया है।
भारत में राष्ट्रपति चुनाव संबंधित राज्यों से आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा होता है। राज्य विधानसभा के प्रत्येक मत के मूल्य का गणना निम्नलिखित सू्त्र से किया जाता है